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फार्मास्यूटिकल हब बनाने में औषधि पौधों का अमूल्य योगदान- डीडीजी।

“औषधीय, सगंध पौध एवं पान शोध परियोजना” विषय पर आयोजित कार्यशाला का हुआ शुभारंभ। 

आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के वेटरनरी ऑडिटोरियम में तीन दिवसीय राष्ट्रीय वार्षिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। “औषधीय, सगंध पौध एवं पान शोध परियोजना” विषय पर आयोजित इस कार्यशाला का शुभारंभ भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के उप महानिदेशक डा. संजय कुमार सिंह, आईसीएआर नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक डा. सुधाकर पांडेय, विवि के कुलपति डा. बिजेंद्र सिंह, औषधीय एवं सगंधीय संस्थान आनंद गुजरात के निदेशक डा. मनीष दास एवं अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलन एवं जल भरो कार्यक्रम के साथ किया। उद्यान महाविद्यालय के अधिष्ठाता डा. संजय पाठक ने सभी अतिथियों को बुके एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के उप महानिदेशक डा. संजय सिंह ने बतौर मुख्यअतिथि संबोधित करते हुए कहा कि प्रकृति के साथ जीवन शैली का समन्वय हमारी संस्कृति रही है, जिसको लेकर विश्व स्तर पर तेजी के साथ जागरूकता बढ़ रही है। हमारे जीवन में औषधि युक्त पौधों का अमूल्य योगदान रहा है जो देश में फार्मास्यूटिकल हब में भी कारगर साबित हुआ है।

डॉ संजय ने कहा कि औषधि युक्त पौधों की खेती और उसे आय का स्रोत बनाने के लिए कृषि विश्वविद्यालयो को अहम भूमिका निभानी चाहिए और सफल किसानों को रोल मॉडल के तौर पर बढ़ावा देना इसका मुख्य उद्देश्य होना चाहिए। देश के कई संस्थान इस क्षेत्र को आगे बढाने पर काम कर रहे हैं। यह क्षेत्र 2047 तक निर्धारित अमृत काल व आत्मनिर्भर भारत को अहम योगदान दे सकती है। 

औषधीय एवं सगंधीय संस्थान आनंद गुजरात के निदेशक डा. मनीष दास ने कहा कि हमारे जीवन में औषधीय एवं सगंधित पौधों का एक अलग महत्व रहा है। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में औषधि खेती को तेजी के साथ बढ़ावा दिया जा रहा है। औषधि खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को समय-समय पर जागरूक करते रहने की जरूरत है।

नेशनल बॉटैनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ वैज्ञानिक अजीत कुमार शाशने ने कहा कि पारंपरिक विधि से औषधि पौधों की खेती कर बाजार के लिए तैयार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किसानों को प्राकृतिक विधि से औषधिय सगंधित पौधों की खेती करने की जरूरत है। कुलपति डा. बिजेंद्र सिंह ने औषधि एवं सगंधित पौधों की खेती पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा मेंथॉलमेंट उत्पादक व निर्यातक देश है। देश के विभिन्न हिस्सों में मेंथो की खेती होती है। स्मोक पर कई पुस्तकों का विमोचन भी किया गया

तीन दिनों तक चलने वाले इस कार्यशाला में राज्यभर से 26 विश्वविद्यालयों एवं केंद्रीय कृषि संस्थानों के लगभग 100 वैज्ञानिक विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी देंगे।

राष्ट्रीय कार्यशाला के मुख्य आयोजक उद्यान अधिष्ठाता डा संजय पाठक व कार्यक्रम का संयोजन डा. राम सुमन मौर्य ने किया। कार्यक्रम का संचालन डा. सीताराम मिश्रा ने किया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के समस्त अधिष्ठाता, वैज्ञानिक, शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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