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सिंचाई पद्धतियों को विकसित करने के लिए जल प्रबंधन जरूरी – डीडीजी।

कृषि विवि में “सिंचाई जल प्रबंधन” विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ।

आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में जल प्रबंधन संस्थान भुवनेश्वर एवं आचार्य नरेंद्र देव कृषि विवि के तत्वाधान में “सिंचाई जल प्रबंधन” विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का शुभारंभ भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली एनआरएम के उप महानिदेशक डा. एस.के चौधरी, विश्वविद्यालय के कुलपति डा. बिजेंद्र सिंह एवं अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर किया।

कार्यशाला में बतौर मुख्यअतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली एनआरएम के उप महानिदेशक डा. एस.के चौधरी ने कहा कि खाद्य सुरक्षा एवं सतत जल प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए कषि क्षेत्र में उपयोग किए जाने वाले पानी की प्रति बूंद से अधिक फसल पैदा करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जल की मात्रा और गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव डाले बिना जल उपयोग दक्षता में वृद्धि करने पर जोर देने की आवश्यकता है। जल प्रबंधन प्रकृति और मौजूदा जैव विविधता के चक्र को बनाए रखने के साथ-साथ कुशल सिंचाई पद्धतियों को विकसित करने में मदद करता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति डा. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि पानी की सद्उपयोग नहीं किया गया तो आनेवाले समय में हमारे देश में पानी का बड़ा संकट खड़ा होगा। जलसंकट को बचाने के लिए सबकी सहभागिता जरूरी है और इसके लिए ब्लाक, गांव व पंचायत स्तर पर लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। जल स्तर लगातार घटता जा रहा है। उन्होंने कहा कि पानी को बचाने के लिए नई-नई तकनीकों को अपनाना होगा और खेतों में ड्रिप सिस्टम लगाना होगा। फसलों को बचाने के लिए ड्रोन के माध्यम से दवा का छिड़काव करना होगा। उन्होंने कहा कि कृषि विवि लगभग दो दर्जन तालाबों के माध्यम से जल प्रबंधन का कार्य कर रहा है। छात्रावास एवं घरों के गंदे पानी को एकत्र कर जल संरक्षण के साथ-साथ मछली पालन कार्य हो रहा है। एग्रोनॉमी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. अनिल कुमार सिंह के संयोजन में कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का संचालन डा. सीताराम मिश्रा ने किया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के समस्त अधिष्ठाता, निदेशक, शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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